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मेदांता इंदौर की अपील : “तंबाकू छोड़िए, क्योंकि कैंसर इंतजार नहीं करता”
अगस्त मध्य में शुरू होगा मेदांता का अत्याधुनिक कैंसर इंस्टिट्यूट
इंदौर, 29 मई 2026। कई बार जिंदगी की सबसे खतरनाक शुरुआत बहुत सामान्य लगती है। दोस्तों के साथ ली गई पहली सिगरेट, तनाव कम करने के नाम पर खाया गया गुटखा या लंबे समय से चली आ रही पान-मसाले की आदत, यही छोटी लगने वाली शुरुआत धीरे-धीरे शरीर के भीतर ऐसी बीमारी को जन्म दे सकती है, जिसका पता अक्सर तब चलता है जब बहुत देर हो चुकी होती है।
विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर मेदांता सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, इंदौर ने लोगों से तंबाकू से दूरी बनाने और कैंसर के प्रति जागरूक रहने की अपील की है। अस्पताल के विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू केवल एक व्यक्तिगत आदत नहीं बल्कि परिवार, समाज और आने वाली पीढ़ियों को प्रभावित करने वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है।
भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां तंबाकू का उपयोग सबसे अधिक है। यहां समस्या केवल सिगरेट या बीड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि गुटखा, खैनी, जर्दा, पान मसाला और अन्य चबाने वाले तंबाकू उत्पादों का व्यापक उपयोग चिंता को और बढ़ाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में तंबाकू सेवन हर वर्ष लगभग 13.5 लाख मौतों का कारण बनता है। यानी औसतन हर दिन हजारों परिवार किसी न किसी तंबाकू-जनित बीमारी की कीमत चुकाते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू का असर केवल फेफड़ों तक सीमित नहीं रहता। यह शरीर के कई अंगों को प्रभावित करता है और मुंह, गला, जीभ, स्वरयंत्र, भोजन नली, फेफड़े, अग्न्याशय और मूत्राशय सहित अनेक प्रकार के कैंसर के खतरे को बढ़ाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार तंबाकू दुनिया भर में हर वर्ष 70 लाख से अधिक लोगों की जान लेता है, जिनमें सेकेंड हैंड स्मोक यानी दूसरों के धुएं से प्रभावित लोग भी शामिल हैं।
भारत में सबसे चिंताजनक स्थिति ओरल कैंसर यानी मुंह के कैंसर को लेकर है। यह बीमारी अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही बल्कि युवाओं और कामकाजी आयु वर्ग में भी तेजी से देखी जा रही है। ग्लोबोकैन 2022 और GATS (वैश्विक वयस्क तंबाकू सर्वेक्षण) जैसे अध्ययनों के अनुसार भारत वैश्विक ओरल कैंसर बोझ का लगभग 23 प्रतिशत वहन करता है और इसके पीछे सबसे बड़ा कारण स्मोकलेस तंबाकू यानी चबाने वाले तंबाकू उत्पाद माने जाते हैं। राष्ट्रीय स्तर के आंकड़े बताते हैं कि भारत में हर वर्ष लगभग 60 हजार नए ओरल कैंसर मामले सामने आते हैं और यह बीमारी इतनी घातक है कि औसतन हर घंटे कई लोगों की जान लेती है।
मेदांता सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, इंदौर के डॉ. अमेय बिहानी, डायरेक्टर, कैंसर केयर ने कहा, “हम अक्सर मरीजों और उनके परिवारों की आंखों में एक ही सवाल देखते हैं, काश हमने समय रहते संकेत पहचान लिए होते। तंबाकू से जुड़ी बीमारियों की सबसे बड़ी त्रासदी यही है कि लोग शुरुआत में इसे गंभीरता से नहीं लेते। मुंह में न भरने वाला घाव, सफेद या लाल चकत्ते, लगातार खांसी, निगलने में परेशानी, आवाज में बदलाव या अचानक वजन कम होना जैसे संकेत शरीर की चेतावनी हो सकते हैं। कैंसर का नाम सुनते ही लोग घबरा जाते हैं, लेकिन यह समझना जरूरी है कि शुरुआती अवस्था में पहचान होने पर कई प्रकार के कैंसर का उपचार सफलतापूर्वक संभव है। तंबाकू छोड़ना केवल अपनी जिंदगी बचाना नहीं है, बल्कि अपने परिवार को मानसिक, भावनात्मक और आर्थिक संकट से बचाना भी है। हम चाहते हैं कि लोग बीमारी आने का इंतजार न करें, बल्कि रोकथाम को प्राथमिकता दें।”
मेदांता सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, इंदौर के डॉ. प्रांजिल मंडलोई, कंसल्टेंट- मेडिकल ऑन्कोलॉजी ने कहा कि “कैंसर केवल मेडिकल चुनौती नहीं बल्कि एक सामाजिक और भावनात्मक संघर्ष भी है। कई मरीज हमारे पास तब पहुंचते हैं जब बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है। उस समय उपचार लंबा, जटिल और आर्थिक रूप से भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। सबसे दुखद स्थिति तब होती है जब युवा मरीज या परिवार के कमाने वाले सदस्य कैंसर की चपेट में आते हैं। इसलिए तंबाकू के खिलाफ जागरूकता केवल अभियान नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी है। लोगों में अब भी यह गलतफहमी मौजूद है कि केवल धूम्रपान खतरनाक है, जबकि गुटखा और अन्य चबाने वाले तंबाकू उत्पाद भी उतने ही नुकसानदेह हैं। भारत में ओरल कैंसर के अधिकांश मामलों के पीछे तंबाकू की भूमिका स्पष्ट रूप से देखी जाती है। अच्छी बात यह है कि शरीर में सुधार की प्रक्रिया तंबाकू छोड़ने के तुरंत बाद शुरू हो जाती है। इसलिए छोड़ने के लिए कोई ‘सही समय’ नहीं होता- सबसे सही समय आज है।”
देश में कैंसर के बढ़ते मामलों को लेकर भी विशेषज्ञों ने चिंता जताई। हालिया अनुमानों के अनुसार भारत में वर्ष 2022 में 14.6 लाख से अधिक नए कैंसर मामले सामने आए और आने वाले वर्षों में यह संख्या और बढ़ने की संभावना है। अनुमान बताते हैं कि भारत में लगभग हर नौ में से एक व्यक्ति अपने जीवनकाल में किसी न किसी प्रकार के कैंसर से प्रभावित हो सकता है।
मेदांता सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, इंदौर के डॉ. संजय गीद, मेडिकल डायरेक्टर ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा में कैंसर उपचार तेजी से विकसित हुआ है और अब मरीजों को अधिक सटीक, व्यक्तिगत और बहु-विषयक उपचार उपलब्ध हैं। हमारा लक्ष्य केवल बीमारी का इलाज करना नहीं बल्कि लोगों में समय रहते जांच और जागरूकता की संस्कृति विकसित करना है। कैंसर के खिलाफ सबसे मजबूत हथियार है — सही जानकारी, शुरुआती पहचान और विशेषज्ञ उपचार तक समय पर पहुंच।”
इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए मेदांता सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, इंदौर 15 अगस्त 2026 को एक समर्पित और अत्याधुनिक कैंसर इंस्टिट्यूट शुरू करने जा रहा है। यह इंस्टिट्यूट कैंसर की प्रारंभिक जांच, विशेषज्ञ परामर्श, मेडिकल ऑन्कोलॉजी सेवाएं, उपचार योजना और मरीजों के लिए समग्र कैंसर देखभाल उपलब्ध कराने पर केंद्रित होगा। अस्पताल प्रबंधन का मानना है कि इससे इंदौर और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को गुणवत्तापूर्ण कैंसर सेवाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकेंगी और महानगरों पर निर्भरता कम होगी।
विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर मेदांता सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, इंदौर ने नागरिकों से अपील की है कि वे स्वयं तंबाकू से दूरी बनाएं, बच्चों और युवाओं को इसकी लत से बचाएं और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने का संकल्प लें। क्योंकि तंबाकू छोड़ने का फैसला केवल आदत बदलने का नहीं, बल्कि जीवन बचाने का निर्णय है।


